BJP का इलेक्‍शन रूट: मोदी की गारंटी से राम राज्‍य वाया संविधान! – BJP 2024 lok sabha election route ram raj by modi gurantee via constitution opnm1


राम मंदिर उद्घाटन समारोह के नाम पर विपक्ष को बचाव की मुद्रा में लाने में बीजेपी की रणनीति काफी हद तक सफल रही. और बिहार में नीतीश कुमार के बीजेपी के पाले में चले जाने के बाद INDIA ब्लॉक तो ठीक से खड़ा होने से पहले ही लुढ़क गया है.

अब राहुल गांधी बिहार पहुंच कर कह रहे हैं कि नीतीश कुमार दबाव में झुक गये. ये तो नहीं मालूम की राहुल गांधी किस तरह के दबाव की बात बताने की कोशिश कर रहे हैं. वैसे नीतीश कुमार पर वैसा कोई दबाव तो था नहीं जो लालू यादव, तेजस्वी यादव और हेमंत सोरेन के मामले में देखा जा रहा है. वैसी ही पूछताछ प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने कांग्रेस नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा से भी की है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी खुद भी ईडी की पूछताछ में शामिल हो चुके हैं, और उनकी मां सोनिया गांधी भी. अगर राहुल गांधी ऐसे किसी दबाव की बात कर रहे हैं, तो नीतीश कुमार के ऊपर ऐसा कोई प्रेशर तो था नहीं. 

नीतीश कुमार के मामले में राहुल गांधी ये भी कह रहे हैं कि जातीय जनगणना के दबाव में बीजेपी ने ये खेल किया है. लेकिन नीतीश कुमार और उनके साथियों की तरफ से तो यही समझाया जा रहा है कि बिहार में जो कुछ हुआ है, वो सब राहुल गांधी के अकेले अकेले न्याय यात्रा निकालने की वजह से हुआ है. 

ये सब तो अभी की बातें हैं, लेकिन राहुल गांधी के भाषणों में पंसदीदा टॉपिक देखें तो वो बीजेपी और आरएसएस को नफरत फैलाने का इल्जाम लगाकर घेरते रहे हैं. और उसके खिलाफ कांग्रेस की तरफ से मोहब्बत की दुकान खोलने का वादा करते हैं.

बीजेपी पर धार्मिक आधार पर वोटों के ध्रुवीकरण और सांप्रदायिकता का आरोप लगाने के साथ ही राहुल गांधी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर देश के संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं को बर्बाद करने का भी आरोप लगाते रहे हैं. 

बीजेपी नेतृत्व ने कांग्रेस सहित पूरे विपक्ष के ऐसे सारे ही आरोपों का काउंटर करने की रणनीति तैयार कर ली है – और इसकी पहली झलक दिखी प्रधानमंत्री मोदी के मन की बात कार्यक्रम के ताजातरीन एपिसोड में. 

क्या संविधान निर्माता ‘राम राज्य’ से प्रेरित थे?

राम मंदिर उद्घाटन समारोह का न्योता बीजेपी के लिए ब्रह्मास्त्र जैसा कारगर हथियार साबित हुआ. ये ऐसा राजनीतिक हथियार बना कि पूरा विपक्ष उसका शिकार हो गया. न्योता तो आयोजन समिति की तरफ से दिया गया था, लेकिन बीजेपी ने कदम कदम पर उसका फायदा उठा लिया. 

कहने को तो विपक्ष के INDIA ब्लॉक का कोई भी नेता अयोध्या नहीं पहुंचा था, लेकिन कांग्रेस के कुछ नेता समारोह में शामिल जरूर हुए थे. ममता बनर्जी सहित कई नेताओं ने तो सीधे सीधे सीधे समारोह का बहिष्कार किया, लेकिन कांग्रेस ने भी काफी नरम रुख दिखाया – और अरविंद केजरीवाल जैसे नेता तो पूरी दिल्ली को ही अयोध्या के रंग में रंग देने की कोशिश करते दिखे. 

कुल मिलाकर राम मंदिर उद्घाटन समारोह के मुद्दे पर विपक्ष जिस तरह बिखरा हुआ और कंफ्यूज दिखा, साफ हो गया कि आने वाले आम चुनाव में बीजेपी के मंदिर मुद्दे को काउंटर करना पूरे विपक्ष के लिए बहुत कठिन टास्क होगा. 

मंदिर समारोह के पहले से जिस तरह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी ने देश के माहौल को राममय बना डाला है, चुनावों में इसका सीधा असर देखने को मिलने वाला है – और ये ऐसा मसला है जिसका काउंटर विपक्ष अपने किसी अलग एजेंडे के साथ ही कर सकता है. 

मंदिर मुद्दे को अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगे बढ़ाते हुए संविधान से जोड़ दिया है. ये बीजेपी की वो रणनीति है जिसके जरिये वो विपक्ष के उन सभी आरोपों को न्यूट्रलाइज कर सकती है, जिसके लिए अक्सर उसे बचाव की मुद्रा में आना पड़ता है. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम में संविधान का खास तौर पर जिक्र किया, और बातों बातों में ये भी समझाने की कोशिश की कि कैसे संविधान भी राम राज्य से प्रेरित है. यानी मोदी लोगों को ये समझाने की कोशिश कर रहे थे कि वे उनके राजनीतिक विरोधियों के बहकावे में तो कतई न आयें, क्योंकि उनकी सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं को बर्बाद करने का इल्जाम बिलकुल बेबुनियाद है. 

‘मन की बात’ के 2024 के पहले एपीसोड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘प्रभु श्रीराम का शासन हमारे संविधान निर्माताओं के लिए प्रेरणा स्रोत रहा है.’

प्रधानमंत्री मोदी का ये बयान बीजेपी की उस रणनीति की तरफ इशारा करता है, जिस पर 2024 के आम चुनाव में वो अमल करने जा रही है. जिस तरह मोदी हाल फिलहाल सबको साथ लेकर चलने की बात कर रहे हैं, ये बात भी वही सब समझाने की कोशिश है – सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास!

राम राज्य और संविधान का रिश्ता क्या कहलाता है

अब तक बीजेपी लोहे को लोहे से काटने की कोशिश करती रही है. जब कांग्रेस और बाकी विपक्षी नेता बीजेपी पर ‘सांप्रदायिकता’ फैलाने का आरोप लगाते हैं, तो वो उन पर ‘तुष्टीकरण’ की नीति अपनाने का आरोप लगाती है – और अक्सर ‘श्मशान बनाम कब्रिस्तान’ की बहस को आगे बढ़ा कर चुनाव जीतने में भी कामयाब हो जाती है. 

लेकिन प्रधानमंत्री के ताजा बयान के बाद ऐसा लगता है जैसे बीजेपी अपने ऊपर लगने वाले आरोपों को काउंटर करने का पुराना तरीका नहीं अपनाने वाली है. अब तो लगता है बीजेपी संघ के हिंदुत्व के एजेंडे को भी संविधान से जोड़ कर चुनावों में पेश करने वाली है.

1. मतलब, प्रधानमंत्री मोदी अपनी स्टाइल में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उन आरोपों को खारिज कर रहे हैं कि बीजेपी की सरकार आरएसएस के हिंदुत्व का एजेंडा लागू करती – जिसे आगे बढ़ाते हुए वो नफरत फैलाने और देश भर में केरोसिन छिड़कने जैसे माहौल में न्याय की लड़ाई लड़ने की बात करते हैं. 

2. बीजेपी पर धार्मिक भेदभाव फैलाने, हिंदू-मुस्लिम को बांटने और सांप्रदायिकता को बढ़ावा देकर वोटों के ध्रुवीकरण के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन मोदी अब गारंटी दे रहे हैं कि जो संविधान राम के शासन से प्रेरित है, उसमें ऐसी बातों का क्या मतलब रह जाता है. 

3. मतलब, 2024 के आम चुनाव में मंदिर मुद्दा हावी तो रहेगा ही, राम राज्य के बहाने बीजेपी अब विपक्ष के संविधान को बर्बाद करने जैसे आरोप लगाने का भी कम ही स्कोप रहने वाला है, क्योंकि संघ और बीजेपी ने जो नैरेटिव सेट किया है, बड़ी संख्या में लोगों ने उसे खुद दिल से गले लगा लिया है.

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