FM Nirmala Sitharaman: संकट में थे बैंक… पूर्व गवर्नर ने नहीं निभाई जिम्‍मेदारी! रघुराम राजन पर वित्त मंत्री ने लगाए आरोप – FM Nirmala Sitharaman allegations against former Reserve Bank Governor Raghuram Rajan tutd


वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman)  ने रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन (Raghuram Rajan) पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्‍होंने कहा कि गवर्नर के रूप में रघुराम राजन अपने कर्तव्‍यों को पूरा करने में विफल रहे, जिससे देश के बैंकिंग सिस्‍टम संकट (Banking System Crisis) में पड़ गया. बैंक परेशानी में थे और उस समय नियामक यानी RBI दूसरी तरफ देख रहा था. रघुराम राजन ने बैंकिंग सिस्‍टम की तरफ ध्‍यान नहीं दिया. 

बिजनेस टुडे के एग्‍जीक्‍यूटिव डायरेक्‍टर राहुल कंवल और मैनेजिंग एडिटर सिद्धार्थ जराबी के साथ बातचीत में वित्त मंत्री ने राजन पर बैंकिंग क्षेत्र (Banking Sectors) के बजाय दूसरी तरफ देखने का आरोप लगाया. उन्‍होंने कहा कि बैंक बाहरी दबाव से निपटने का काम कर रहे थे. राजन को उन्‍हें बाहरी दबाव से बचाना चाहिए था और बैकों को नियमों के बारे में जानकारी देनी चहिए थी. लेकिन ऐसा नहीं किया गया. 

राजन इकोनॉमिस्‍ट हैं या राजनेता? 
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने कहा कि पूर्व गवर्नर को पहले यह स्‍पष्‍ट करना चाहिए कि क्‍या वह हर बार बोलते समय एक इकोनॉमिस्‍ट होते हैं या फिर राजनेता की टोपी पहनकर बोलते हैं. दरअसल, वित्त मंत्री ने यह जवाब तब दिया है, जब कुछ दिन पहले ही रघुराम राजन (Raghuram Rajan) ने कहा था कि देश को विकसित (Developed Country) बनने के लिए 9 से 10 फीसदी ग्रोथ का टारगेट (GDP Growth Target) रखना चाहिए. 

‘मौजूदा ग्रोथ पर भारत नहीं हो पाएगा विकसित देश’
रघुराम राजन ने कहा था कि विकास की मौजूदा दर पर भारत 2047 तक चीन की वर्तमान प्रति व्‍यक्ति आय तक पहुंच जाएगा, लेकिन भारत को बढ़ती आबादी का भी सामना करना पड़ेगा. उन्‍होंने यह भी कहा कि अगर भारत मौजूदा रेट से ग्रोथ करता है तो 2047 तक विकसित देश की कैटेगरी में नहीं आ पाएगा.  

भारत को इन बातों पर करना होगा फोकस: रघुराम राजन 
रघुराम राजन (Raghuram Rajan) ने कहा था कि चीन की तर्ज पर विनिर्माण पर ध्‍यान केंद्रित करने वाला एक सत्तावादी बदलाव अब आधुनिक समय और ग्‍लोबल मार्केट में एक विकल्‍प के तौर पर नहीं होगा. उन्‍होंने कहा कि भारत को मानव पूंजी और बौद्धिक संपदा बनाने की क्षमता पर फोकस करना होगा.  

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