Hate Speech Case: आजम खान को अपील में नहीं मिली राहत, निचली कोर्ट का फैसला बरकरार   – Azam Khan did not get relief in appeal against Hate Speech Case lower court decision upheld


हेट स्पीच के मामले में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान की अपील एमपी एमएलए कोर्ट सेशन ट्रायल में खारिज हो गई है. यह फैसला आजम खान के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. क्योंकि इस अपील के खारिज होने से आजम खान की उम्मीद की एक किरण धुंधला गई है. 

दरअसल, 2019 के लोकसभा आम चुनाव में आजम खान रामपुर लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन के प्रत्याशी थे. चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए उनके एक भाषण को आपत्तिजनक मानते हुए थाना शहजाद नगर रामपुर में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी. 

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इस मामले में उनके विरुद्ध पुलिस ने चार्जशीट लगाई थी. रामपुर की एमपी एमएलए कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) ने उन पर ढाई हजार रुपए जुर्माना लगाते हुए 2 साल की सजा सुनाई थी. इसके खिलाफ उन्होंने रामपुर के एमपी एमएलए कोर्ट (सेशन ट्रायल) में अपील की थी. वहां आजम खान की अपील को कोर्ट ने खारिज कर दिया.

8 अप्रैल 2019 को दिया था आपत्तिजनक भाषण 

इस विषय पर अभियोजन अधिकारी शिव प्रकाश पांडे ने बताया कि 2019 का लोकसभा निर्वाचन का समय था. उस समय आजम खान गठबंधन प्रत्याशी थे. लोकसभा में इनके द्वारा धमोरा में 8 अप्रैल 2019 को एक भाषण दिया गया था. तब डीएम आंजनेय कुमार सिंह चुनाव आयोग के निर्देशन में रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका में थे. 

वह चुनाव आयोग के निर्देशन में चुनाव प्रक्रियाओं के संचालन कर रहे थे. इसी दौरान आजम खान ने भाषण में उत्तर प्रदेश सरकार के वर्तमान मुख्यमंत्री और तत्कालीन डीएम आंजनेय कुमार सिंह के विरुद्ध भी अभद्र टिप्पणियां की थीं. इसके चलते उनके खिलाफ हेट स्पीच के संबंध में मुकदमा कायम हुआ था. 

अभियोजन पक्ष की तरफ से पेश हुए थे 7 गवाह 

अधीनस्थ न्यायालय में यह मुकदमा चला. अभियोजन की तरफ से 7 गवाह और बचाव पक्ष की तरफ से 11 गवाह पेश किए गए. मौखिक साक्षी और दस्तावेजी साक्ष्य के आधार पर एसीजेएम प्रथम शोभित बंसल एमपी एमएलए न्यायालय ने उन्हें दो साल की जेल और 2,500 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई. 

इस आदेश के खिलाफ आजम खान ने अपील की थी. सत्र न्यायालय ने मंगलवार को मौखिक और दस्तावेज साक्ष्य के आधार पर उनकी अपील को खारिज कर दिया है. साथ ही अधीनस्थ न्यायालय द्वारा दी गई सजा को बहाल रखा है. 

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